मकर संक्रांति
पुष्टिमार्ग मकर संक्रांति सेवा क्रम, पतंग के पद, उत्तरायण श्रीनाथजी दर्शन, मकर संक्रांति की भावना महत्व,भोगी संक्रांति, गेंद खिलावे के पद, श्रीनाथजी दर्शन |
तिथि : पोष शुक्लपक्ष पंचमी
भारतीय तिथियों का आँकलन चंद्रमा के आधार पर किया जाता है | उत्सव भी उसी अनुसार मनाए जाते है|
परंतु आज का उत्सव सूर्य के अनुसार किया जाता है | संक्रांति – संक्रमण माने सूर्य सम्पूर्ण वर्ष दरमियान अलग अलग राशिओ मे प्रवेश – संक्रमण करते है | उस कारण से संक्रांति होती है | कुल 12 राशिओ से 12 संक्रांति होती है | जिनमे चार संक्रांति का महत्व है |
पुष्टिमार्ग ने दो संक्रांति को अधिक महत्व दिया गया है | मकर संक्रांति , मेष संक्रांति | मेष संक्रांति अंगेरजी अपेल महीने मे आती है | मकर संक्रांति मे सूर्य देव मकर राशि मे प्रवेश करते है एवं दक्षिणायन से उत्तरायण मे आते है |
पुष्टिमार्ग मे मकर संक्रांति का भाव कुछ यह है की दो संक्रांति होती है | मकर संक्रांति के अगले दिन भोगी संक्रांति | और आज के दिवस जोगी संक्रांति |
भोगी संक्रांति :
सभी जीव – वैष्णव अलग भाव से प्रभु की सेवा करते है | दास्य भाव, साख्य भाव, वात्सल्य भाव, माधुर्य भाव ( वैसे तो दास्य भाव सिद्ध होने पर ही बाकी के भाव को हृदय मे धारण हो शकता है ) | प्रभु श्री कृष्ण वैष्णवों की इन सभी भावों से सेवा अंगीकृत करते है | सभी भावों के भोक्ता है | भोगी है | इस कारण से भोगी संक्रांति |
जोगी संक्रांति :
प्रभु ने द्वारिकालीला म ग्रहस्थाश्रम पालन करने बाद भी सभी आत्मा मे होने के कारण ब्रम्हचारी है | जोगी है | इस कारण से आज जोगी संक्रांति है |
व्रज लीला :
व्रज मे प्रभु बाल भाव मे अपने सखाओ के साथ आज के दिन गेंद से खेलते है | अपने सखाओ एवं गोपियों के साथ मिलकर पतंग उड़ाते है | खेल का आनंद लेते है |

उड़ी उडावन लागे लाल ॥
सुंदर पथक बांध मनमोहन बाजत मोरनके ताल ॥१॥
काऊ पकरत कोऊ एंचत कोऊ देखत नैन विशाल ॥
इस कारण से आज प्रभु सेवा मे प्रभु सन्मुख नई गेंद धरी जाती है | पतंग धरी जा सकती है | प्रभु सन्मुख गेंद खेलवे के पद, पतंग के पद गाए जाते है | आज प्रभु को तिलवा की सामग्री अवश्य धरी जाती है | प्रभु को विशेष रूप से सात धान्यो से सिद्ध खींच एवं मीठी खींच धरी जाती है |


