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माघ शुक्लपक्ष 5

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बसन्त पंचमी । वसंत पंचमी सेवा क्रम :
आज से बसंत ऋतु का आगमन हो रहा है. आज भगवान श्री कृष्ण के पुत्र प्रद्युम्न जी का प्राक्टयोत्सव है , जो कामदेव के अवतार हैं। इसलिए आज इसे मदन महोत्सव भी कहा जाता है। वसंत पंचमी से 40 दिनों तक प्रभु सेवा में दास्य भाव के स्थान पर सख्य भाव – सखाभाव से उत्सव मनाया जाता है। आज से सेवा में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा. आज से शित्कालीन सेवकराम के शितोपचार वडा होंगे। और सफेद रंग सजावटी रूप से धारण होगा । सिहाशन, पिछवाई आदि में सफेद रंग सजाया जाएगा।

वसंत पंचमी पर श्रृंगार सेवा में भगवान को सफेद छींट के लाल किनारी वाले वस्त्र धराए जाएंगे । सादी सफेद खिड़की की पाघ . सादी मोर चंद्रिका धराई जाएगी. आज से आभूषण सुवर्ण, मीनाकारी माणिक के धरे जाएंगे । वसंत पंचमी से 40 दिनों तक चिबुक नहीं धरे जाएंगे. और दोहरी गुंजामाला. यानी 2 गुंजा माला धरी जाएगी . इस दिन से प्रभु छोगा छड़ी धरी जाएगी. आज से प्रभु को जरी के वस्त्र नहीं धरे जाएंगे |

सामग्री के क्रम में खजूर और फगुआ मावा। साथ ही लीला मेवा और सूखे मेवे का भोग लगाया जाएगा | नाथद्वारा में आज 2 राजभोग धरे जाएंगे. जिससे आज के दिन ९ समा के दर्शन होंगे. प्रथम राजभोग के बाद वसंत कलश जो प्रेम की आराधना का प्रतीक है। राधाजी प्रभुकी सेवा में, वसंत के आगमन के प्रतीक के रूप में, कलश में जल भरा जाता है और कलश मे आम के पेड़ के पत्तों, खजूर की शाखाओं, सरसों के पीले फूलों, आम्र मंजरी शाखाओं सहित अन्य फूलों से सजाया जाता है। और कलश अधिवासन होता है | जिसके नाथद्वारा सेवा क्रम में दर्शन किए जा सकते है।

द्वितीय राजभोग के पश्चात प्रभु खेल खिलाए जाएंगे |

आज से 40 दिनों तक 4 यूथ (निर्गुण, तमस, रजस, सात्विक) के भक्तों द्वारा भगवान को केसर, चोवा, चंदन, अबीर, गुलाल आदि से खेल खेलाए जाते है। सखा भाव से सेवा भाव के कारण प्रभु के श्रीचरणों को सफेद वस्त्र से ढका जाता है। पहले 10 दिनों में हल्का खेल खेला जाता है। जिसमें चोवा, अबीर, चंदन, केसर की बिंदी अनामिका उंगली से लेकर वस्त्र पर लगाई जाती है | खंडपाट, पिछवाई मे खेल खिलाए जाते है | धीरे-धीरे खेल की मात्रा बढ़ती जाती है, धमार के अंतिम 10 दिनों में अधिक भारी खेल आता है।

आज से कुंज एकादशी तक राजभोग खेल में श्री गुसाइजी की अष्टपदी गाई जाती है।

सेवा क्रम :
वसंत पंचमी श्रीनाथजी सेवा क्रम

डेली मंडे, बन्दर वाल बंधे।जमनाजल की झारीजी आवे।थाली की आरती ।गेंद चौगान ,दिवला चाँदी के।अभ्यंग होवे।खंड,पाट सब साज चाँदी को आवे,डोल तक रहे।आज से शयन के दर्शन बाहर खुलने प्रारंभ हो जाएंगे |

वस्त्र:- घेरदार बागा,चोली,सुथन,सब स्वेत,अड़तू के आवे।पटका मोठड़ा को,पाग स्वेत,स्याम खिड़की की।ठाड़े वस्त्र लाल।पिछवाई स्वेत मलमल की।आज सो छोगा छड़ी नित्य आवे।

आभरण:- सब फागुन के।सोना,माणक, मीना के मिलमा।श्रृंगार छेड़ान से दो आगुल नीचे।सिरपेच की जगह ,पट्टी दर जडाऊ कटिपेच आवे।श्रीमस्तक पे एक मोर चन्द्रिका।वेणु वेत्र सोना के बटदार।आरसी दोनों समय बड़ी डाँड़ी की।40 दिन गुंज्जा माला दोहरा आवे।पट चीड़ को,गोटी चाँदी की।

नाथद्वारा में आज 2 राजभोग धरे जाएंगे. जिससे आज के दिन ९ समा के दर्शन होंगे. प्रथम राजभोग के बाद वसंत कलश जो प्रेम की आराधना का प्रतीक है। कलश अधिवासन होगा | राजभोग में बीच के चौका पे बसंत को हांडा आवे।

श्री को चन्दन,गुलाल,अबीर,चोवा से खिलावे।फिर ठाड़े वस्त्र,पिछवाई, बसंत,चंदवा को खिलावे।अबीर, गुलाल उड़े।फिर दूध घर,शाग घर,बालभोग के उत्सव भोग आवे।तुलसी,शंखोदक,धुप दिप होवे तत्पश्चात दर्शन खुले।आरती में पुष्प उड़े।

गोपी वल्लभ मैवा बाटी,फिका में चालनी,वारा बड़े सेव के नग।रसोई में मीठी सेव,केसरी पेठाआदी अरोगे। सायं आरती पीछे सब श्रृंगार बड़े होवे।लूम तुर्रा सुनहरी धरावे।शयन के दर्शन खुले।।

मंगला – मोहन सों मन मान्यो

श्रृंगार – माई री आज और काल और

राजभोग (खेल) – ब्रज युवती शत संगे

राजभोग – गावत चली बसंत बधावन

आरती – देखत बसंत समे ब्रज सुंदर

शयन – गोवर्धन की शिखर चारु

Seva kram courtesy: Shrinathji Temple Nathdwara Management |

Vasant Nitya Seva Kirtan

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