वसंत पंचमी

वसंत पंचमी पुष्टिमार्ग श्रीनाथजी सेवा क्रम, वसंत पंचमी महत्व, पूजन, मदन महोत्सव, होली खेल के चालीस दिन की भावना, वसंत के पद , कृष्ण लीला, आज से नित्य सेवा मे होने वाले फेरफार की जानकारी |

वसंत पंचमी का महत्व

तिथि : माघ शुक्लपक्ष पंचमी

पुष्टिमार्ग और व्रज में वसंत पंचमी से 40 दिनों तक वसंतोत्सव मनाया जाता है, जिसका भाव  पुष्टिमार्ग के अनुसार समजते है । शरद ऋतु के बाद नई ऋतु के आगमन से पूरी प्रकृति खिल उठती है। वैसे तो  फागण और चैत्र वसंत ऋतु के  मास हैं। लेकिन हमारे पुराणों में एक बात कही गई है कि प्रत्येक ऋतु का गर्भाधान  40 दिन पहले हो जाता है।

इसलिए पुष्टिमार्ग में वसंतोत्सव-होलीखेल  होली  से 40 दिन पहले वसंत पंचमी से शुरू हो जाता है।  आज श्री कृष्ण के पुत्र कामदेव का भूमि पर अवतार श्री प्रद्युम्न जी का प्राकट्य उत्सव है | कामदेवजी का एक नाम मदन है इस कारण से ‘मदन महोत्सव’ भी कहते है |

वसंत पंचमी उत्सव को प्रेम के पूजन का उत्सव के भाव के रूप मे भी देखा जाता है | आज राधाजी प्रभुकी सेवा में, वसंत के आगमन के प्रतीक के रूप में, कलश में जल भरा जाता है और कलश मे  आम के पेड़ के पत्तों, खजूर की शाखाओं, सरसों के पीले फूलों, आम्र मंजरी शाखाओं सहित अन्य फूलों से सजाया जाता है।

और कलश अधिवासन होता है | जिसके  नाथद्वारा सेवा क्रम में दर्शन किए जा सकते  है। जो प्रेम की आराधना का प्रतीक है |  

वसंत पंचमी कलश अधिवासन पुष्टिमार्ग

आज से प्रभु के साथ दास्य भाव के स्थान पर साख्य भाव से प्रभु के साथ यह 40 दिन का वसंतोत्सव मनाया जाएगा |   

होरी खेल के ४० दिनों के भाव को अच्छे से जानने हेतु नीचे दर्शाये लिंक पर स्पर्श करे

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श्रीनाथजी दर्शन – वसंत पंचमी

वसंत पंचमी श्रीनाथजी दर्शन

वसंत पंचमी श्रीनाथजी सेवा क्रम

डेली मंडे, बन्दर वाल बंधे।जमनाजल की झारीजी आवे।थाली की आरती ।गेंद चौगान ,दिवला चाँदी के।अभ्यंग होवे।खंड,पाट सब साज चाँदी को आवे,डोल तक रहे।आज से शयन के दर्शन बाहर खुलने प्रारंभ हो जाएंगे |

वस्त्र:- घेरदार बागा,चोली,सुथन,सब स्वेत,अड़तू के आवे।पटका मोठड़ा को,पाग स्वेत,स्याम खिड़की की।ठाड़े वस्त्र लाल।पिछवाई स्वेत मलमल की।आज सो छोगा छड़ी नित्य आवे।

आभरण:- सब फागुन के।सोना,माणक, मीना के मिलमा।श्रृंगार छेड़ान से दो आगुल नीचे।सिरपेच की जगह ,पट्टी दर जडाऊ कटिपेच आवे।श्रीमस्तक पे एक मोर चन्द्रिका।वेणु वेत्र सोना के बटदार।आरसी दोनों समय बड़ी डाँड़ी की।40 दिन गुंज्जा माला दोहरा आवे।पट चीड़ को,गोटी चाँदी की।

नाथद्वारा में आज  2 राजभोग धरे जाएंगे. जिससे आज के दिन ९ समा के दर्शन होंगे. प्रथम राजभोग के बाद वसंत कलश जो प्रेम की आराधना का प्रतीक है।  कलश अधिवासन होगा |  राजभोग में बीच के चौका पे बसंत को हांडा आवे।

श्री को चन्दन,गुलाल,अबीर,चोवा से खिलावे।फिर ठाड़े वस्त्र,पिछवाई, बसंत,चंदवा को खिलावे।अबीर, गुलाल उड़े।फिर दूध घर,शाग घर,बालभोग के उत्सव भोग आवे।तुलसी,शंखोदक,धुप दिप होवे तत्पश्चात दर्शन खुले।आरती में पुष्प उड़े।

गोपी वल्लभ मैवा बाटी,फिका में चालनी,वारा बड़े सेव के नग।रसोई में मीठी सेव,केसरी पेठाआदी अरोगे। सायं आरती पीछे सब श्रृंगार बड़े होवे।लूम तुर्रा सुनहरी धरावे।शयन के दर्शन खुले।।

मंगला – मोहन सों मन मान्यो

श्रृंगार – माई री आज और काल और 

राजभोग (खेल) – ब्रज युवती शत संगे

राजभोग – गावत चली बसंत बधावन 

आरती – देखत बसंत समे ब्रज सुंदर 

शयन – गोवर्धन की शिखर चारु

Seva kram  courtesy: Shrinathji Temple Nathdwara Management |

आज से सेवा में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा. आज से शित्कालीन सेवकराम के शितोपचार वडा होंगे। और सफेद रंग सजावटी रूप से धारण होगा । सिहाशन, पिछवाई आदि में सफेद रंग सजाया जाएगा। वसंत पंचमी से 40 दिनों तक चिबुक नहीं धरे जाएंगे |

दोहरी गुंजामाला. यानी 2 गुंजा  माला धरी जाएगी | इस दिन से प्रभु छोगा छड़ी धरी जाएगी | आज से प्रभु को जरी के वस्त्र नहीं धरे जाएंगे |सामग्री के क्रम में खजूर और फगुआ मावा। साथ ही लीला मेवा  और सूखे मेवे का भोग लगाया जाएगा | आज से कुंज एकादशी तक राजभोग खेल में श्री गुसाइजी की अष्टपदी गाई जाती है।

आज से बसंत राग का कीर्तन गाये  जाते  है  | और आश्रय पद में नियमित गाए  जाने वाले पदों के स्थान पर आश्रय पद “श्री वल्लभ प्रभु करुणा सागर” गाया जाता है।

बसंत पंचमी के पद :

वसंत पंचमी के पद, होरी डंडा रोपण के पद, कुंज एकादशी के पद, गुसाइजी की अष्टपदी, डोल के पद, होली खेल के 40 दिवस दरमियान नित्य सेवा के पद नीचे दी गई ई-बुक मे है |

Vasant Nitya Seva Kirtan

जो हमारे पध्य साहित्य शेकशन मे उपलब्ध है |