श्रीनाथजी – नवनीत प्रियाजी पाटोत्सव
नाथद्वारा श्रीनाथजी नवनीत प्रियाजी पाटोत्सव पुष्टिमार्ग इतिहास , श्रीनाथजी दर्शन, श्रीनाथजी पाटोत्सव के पद, सेवा क्रम , कहानी | आजके उत्सव का पुष्टिमार्ग मे एक विशेष महत्व है | यह तिथि पर श्रीनाथजी के पाटोत्सव इतिहास रोचक और दिव्य है |
एक समय श्रीनाथजी ने श्री गुसाइजी-काकाजी को घर “सतघरा” पधारने का मनोरथ श्री गिरधरजी के समक्ष रखा तब श्री गिरधरजी सहर्ष श्रीनाथजी को गोपाल पूरा (जतिपुरा) से सतघरा पधराए और आज की तिथि पर सतघरा मे पाट पधराए | और समग्र परिवार के साथ श्रीनाथजी की दो माह सेवा की |
जब प्रभु श्रीनाथजी सतघरा में बिराजे, उस समय मथुरा में खेल ख्याल-स्वांग की मंडली अपना वेश भूषा प्रस्तुत करती थी, जिसे प्रभु श्रीनाथजी निहारना चाहते थे, इसलिए श्री गिरधरजी ने सतघरा में ही नियमित प्रभु के सन्मुख ख्याल – स्वांग का क्रम स्थापित किया। जो आज तक प्रभु सेवा मे श्री नाथद्वारा में क्रम में कायम है, जो आज से डोलोत्सव तक होता है। जिसमें बच्चे विभिन्न देवी-देवताओं, गंधर्वों, सखाओं का रूप धारण करते हैं और प्रभु के सन्मुख नृत्य करते हैं जिससे बाल रूप श्रीनाथजी प्रसन्न होंते है |

प्रभु श्रीनाथजी अजब कुवर बाई को दीए वचन को पूर्ण करने के लिए ब्रिज से नाथद्वारा पधारे तब उनके बैलगाड़ी का पहिया जमीन धस गया और उसी जगा प्रभु आजकी तिथि पर पाट बिराजे | वह स्थान आजके समय मे खर्च भंडार के नाम से जाना जाता है | यहा पर प्रभु तीन बार बिराजे (संवत 1623, 1728 व 1864) |
जानकारी : जहा प्रभु श्रीनाथजी अभी गर्भ गृह मे पाट पर बिराज रहे हे , शुरू से वही नहीं बिराज रहे थे , शुरू शुरू मे प्रभु आज के खर्च भंडार के स्थान पर बिराज रहे थे जहा प्रभु महा वद सप्तमी को बिराजे थे |
आजके समय मे भी खर्च भंडार मे श्रीनाथजी का चित्रजी बिराजमान है जहा उनकी नित्य सेवा होती है और हर वर्ष इस तिथि के विशेष अवसर पर यह स्थान को सजाया जाता है और प्रभु को वहा भी भोग धराया जाता है |
सेवा क्रम मे बदलाव :
प्रभु की सेवा मे ऋतु का आरंभ एवं विदाई धीरे धीरे होती है | इस अनुसार शीतऋतु अब धीरे धीरे विदाय ले रही है | आज से प्रभु को केवल शृंगार के दर्शन मे जलरंगों की पिछवाई धरानी आरंभ होती है | यह पिचवाई डोलोत्सव तक केवल शृंगार मे ही धरी जाएगी |
आज से प्रभु को मोजाजी नहीं धराए जाएंगे | अगर शीत हो तो धरे जाते है | आज से प्रभु को चरणारविंद के शृंगार धराने आरंभ होंगे | शीत हो तो आज के दिन के अलावा मोजाजी धरे जाएंगे | आज से डोलोत्सव तक नाथद्वारा मे श्रीजी और श्री नवनीतप्रियाजी के सन्मुख ख्याल (स्वांग) आरंभ होंगे | जो परंपरा गिरधरजी से शुरू हुई थी |
श्रीनाथजी दर्शन – श्रीनाथजी पाटोत्सव
राग सुघराई
फणुवा के मिसि छलबल लालको रंगन रगमगोकीजे |
यह औसर होरी को गोरी सुखलेसुख किनदिजे ||१॥
करत सेंत की संकोच सकुचजिय इनसकुचन कहीधोंकहाकीजे ||
धरकोछांडि धायगिरीधर पियको निधरक व्हैं रसपीजे ॥२॥






