भाई दूज – यम द्वितीया

भाई दूज पुष्टिमार्ग भाव महत्व  , यम द्वितीया कथा , श्रीनाथजी दर्शन , श्री कृष्ण लीला, भाई दूज के पद, पुष्टिमार्ग उत्सव सेवा क्रम | भाई – बहन के प्यार का मंगल उत्सव |

तिथि : कार्तिक शुक्लपक्ष द्वितीया

कथा :

आज के दिवस श्री यमुनाजी ने अपने भ्राता श्री यमराज को भोजन पर आमांत्रित किया | स्वागत सत्कार किया | अक्षत तिलक किया | फिर स्नेह आग्रह से भोजन कराया | तब यमराज अपनी बहन के स्नेह अती प्रसन्न हुए और उन्हे आशीर्वाद दिया की जो भी इस दिवस जो भी आपके जल का पान करेगा , स्नान करेगा उन्हे यम यातना से मुक्ति मिल शक्ति है | समृद्धि प्राप्त होगी |

तब यमलोक मे भी  नारकी जीवों को यातना से मुक्ति मिली |  पापमुक्त होकर सभी बंधनों से मुक्त हो गए | तृप्त हो गए | और आजके दिवस उन सबने यमलोक मे भव्य उत्सव मनाया | जो यमलोक के लिए सुखकारी था | इस कारण आज से यह उत्सव यम द्वितीया के नाम से प्रख्यात हुआ |

श्री कृष्ण लीला : 

जब प्रभु नरकासुर का वध करके लौट रहे थे , तब अपनी प्यारी बहन सुभद्राजी के घर गए थे | तब बहन सुभद्राजी ने अपने दोनों भाई श्री कृष्ण, बलराम जी का भव्य स्वागत किया | दोनों को कुंकुम अक्षत से तिलक किया | 

भाई दूज कृष्ण लीला कथा , यम द्वितीय कथा , भाई दूज पूजा विधि

फिर सुभद्रा जी दोनों भाई को प्रेम भोजन कराती है | श्री कृष्ण – बलराम जी दोनों बहन के प्रेम को देखकर प्रसन्न होते है |

आज दूज भैया की कहियत, कर लिये कंचन थाल के l
करो तिलक तुम बहन सुभद्रा, बल अरु श्रीगोपाल के ll 1 ll
आरती करत देत न्यौछावर, वारत मुक्ता माल के l
‘आशकरण’ प्रभु मोहन नागर, प्रेम पुंज ब्रजबाल के ll 2 ll

भाई दूज कृष्ण लीला कथा , यम द्वितीय कथा , भाई दूज पूजा विधि , सुभद्रा कृष्ण लीला भाई दूज , भाई दूज भोजन

श्रीनाथजी दर्शन 

श्रीनाथजी दर्शन यम द्वितीया , श्रीनाथजी दर्शन भाई दूज
image source : shrinathji nitya darshan Facebook page

..

आज सभी द्वार में हल्दी से डेली माड़ी जाती है।व बन्दर वाल बाँधी जाती है।थाली की आरती।आरसी चार झाड़ की।बंटा,कुंजा,तकिया जडाऊ।

वस्त्र:- घेरदार बागा,चोली,सुथन सब लाल खिनखाब के।चीरा सुनहरी,फुलक साही जरी को।पटका रूपहरी जरी को,एक छोर आगे,एक बगल को।ठाड़े वस्त्र चिकने(लट्ठा)के।पिछवाई लाल ,मोतीं के काम की,नि. ली.गोस्वामी श्री गोवर्धन लाल जी महाराज की।

आभरण:- श्रंगार हल्के। आभरण सब पन्ना के, उत्सव के।चार माला,चीरा पे सिरपेच की जगह पन्ना धरावे।वाके ऊपर नीचे मोतीं की माला धरावे।श्री कर्ण में पन्ना के कर्णफूल एक जोड़ी।श्रीमस्तक पे एक मोर चन्द्रिका सादा।वेणु वेत्र हीरा के।

श्रीमस्तक पर सुनहरी फुलक शाही ज़री की पाग (चीरा) के ऊपर सिरपैंच के स्थान पर पन्ना, जिसके ऊपर नीचे मोती की लड़, मोरपंख की सादी चन्द्रिका एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं |

राजभोग के आगे के भोग धरके राजभोग की माला धरावे।दंडवत करे।झालर,घंटा,शंख,नोबत बजे ,फिर श्री के तिलक होवे।बीड़ा,तुलसी समर्पे।फिर सब स्वरूप को तिलक होवे।चार मुठिया वार के चुन की आरती होवे।न्योछावर होवे।फिर आप श्री के और आप श्री ,सब सेवकन के तिलक करे।  

बहन सुभद्रा के घर भोजन अरोगें इस भाव से प्रभु आज राजभोग अरोगते हैं |

आरती पीछे श्रीकंठ के श्रृंगार बड़े होवे।लूम तुर्रा सुनहरी।

गोपी वल्लभ कुर के पके गूंजा।फिका में चालनी।

मंगला – लीला लाल गोवर्धनधर की 

राजभोग – महिमा में जानी अब न छडो 

आरती – कान्ह कुँवर के कर पल्लव 

शयन – राजे गिरिराज आज 

मान – आली री मान गढ 

पोढवे – सोवत नींद आय गई

राजभोग समय तिलक होवे – आज दूज भैय्या की कहियत कर लिये कंचन थाल

Seva kram  courtesy: Shrinathji Temple Nathdwara Management | 

धन तेरस से देव प्रबोधिनी एकादशी के सभी उत्सव के पद, (धन तेरस के पद, रूप चतुर्दशी के पद, दीपावली के पद, दीपमालिका के पद, हटरी के पद, कान जगाई के पद, अन्नकूट के पद, गोवर्धन पूजन के पद, भाई दूज के पद, गोपाष्टमी के पद, देव प्रबोधिनी एकादशी के पद) नीचे उपलब्ध ई-बुक मे प्राप्य है |

धन त्रयोदशी से देव प्रबोधिनी एकादशी के पद

यह ई-बुक आप हमारे पध्य साहित्य शेकशन मे से भी प्राप्त कर शकते है |