दीवाली
दीवाली पुष्टिमार्ग सेवा क्रम , दीपावली श्रीनाथजी दर्शन, पुष्टिमार्ग दीवाली कीर्तन , दीवाली पूजन, कान जगाई का अर्थ, हटरी का अर्थ , पुष्टिमार्ग भाव, दीपमालिका भाव, दिवाली के पद -कीर्तन |
तिथि : अश्विन कृष्णपक्ष अमावश्या
आज दीपोत्सव का मंगल उत्सव है | वैसे तो समग्र भारत वर्ष मे यह उत्सव बड़े धूम धाम से मनाया जाता है | पुष्टिमार्ग के अंदर कुछ विशेष भाव से यह उत्सव को मनाया जाता है | पुष्टिमार्ग के सेवा क्रम मे प्रभु की व्रज की लीला की झाखी देखने को मिलती है |
आज शरद पूर्णिमा की तरह पोढ़वे के समय शृंगार बड़े नहीं होंगे | आज पोढ़वे के पद एवं दूसरे दिन जगायवे के पद सेवा मे नहीं गाए जाएंगे | आज के दिवस दीप मालिका, कान जगाई, हटरी जैसे मनोरथ होते है |

दीप मालीका
आज साज मे प्रभु के सन्मुख दीप माला विशेष कर धराई जाती है | इस तरह से धराई जाती जैसे प्रकाश प्रभु के श्री मुखारविंद पर ना पड़े |
दीप (दिया) का भाव :
दीप माटी से बनता है और माटी दीनता का भाव है | दीनता से बना पात्रता वाला जीव , बाती कपास से बनती है | जो सुघड़ता और कोई भी परिस्थिति मे अपने आपको भक्ति और प्रभुकी सेवा योग्य बनाए रखने की तत्परता को दर्शाती है |
और घी रसिक जन की वाणी , सत्संग का भाव है | घी से प्रज्वालित दिया दीनता की भावना वाला जीव सत्संग से पोषित हो कर प्रभु सेवा मे तत्परता का भाव है |
कान जगाई
कान जगाई का अर्थ क्या है ? भाव एवं महत्व को जानने के लिए एवं श्री कृष्ण लीला को जानने के लिए नीचे दी गई लिंक पर टच करके अथवा ऊपर दीए गए चित्रजी पर स्पर्श करके हमारे वार्ता प्रसंग सेक्शन मे जाए |
“गोकर्ण जागरण”
हटड़ी मनोरथ
हटड़ी का अर्थ क्या है ? हटडी का भाव के बारे मे विशेष रूप से जानने के लिए एवं श्री कृष्ण लीला जानने के लिए नीचे दी गई लिंक पर टच करे | अथवा ऊपर दीए गए चित्रजी पर स्पर्श करे |
“हटडी भाव”
Shrinathji Darshan
धन तेरस से देव प्रबोधिनी एकादशी के सभी उत्सव के पद, (धन तेरस के पद, रूप चतुर्दशी के पद, दीपावली के पद, दीपमालिका के पद, हटरी के पद, कान जगाई के पद, अन्नकूट के पद, गोवर्धन पूजन के पद, भाई दूज के पद, गोपाष्टमी के पद, देव प्रबोधिनी एकादशी के पद) नीचे उपलब्ध ई-बुक मे प्राप्य है |
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