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SUMMARY:भाद्रपद कृष्णपक्ष 1
DESCRIPTION:श्राद्ध पक्ष को आरंभ
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SUMMARY:भाद्रपद शुक्लपक्ष 15
DESCRIPTION:सांझी को आरम्भ । खग्रास चंद्र ग्रहण |
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SUMMARY:भाद्रपद शुक्लपक्ष 12
DESCRIPTION:वामन द्वादशी  \nमंगला दर्शन के पश्चात प्रभु को चन्दन\, आवंला\, एवं फुलेल (सुगन्धित तेल) से अभ्यंग (स्नान) कराया जाता है | वामन जयंती के अवसर पर नाथद्वारा मे दो राजभोग दर्शन होते है | \nप्रथम राजभोग दर्शन में लगभग बारह बजे के आसपास अभिजित नक्षत्र में श्रीजी के साथ विराजित श्री सालिग्रामजी को पंचामृत स्नान कराया जाता है | एवं दर्शन के उपरांत उनको अभ्यंग\, तिलक-अक्षत किया जाता है | और श्रीजी के समक्ष उत्सव भोग रखे जाते हैं | \nकई बार एकादशी का क्षय होकर वामन द्वादशी होती है | जभी भी यह अवसर आए तब एकादशी के स्थान पर वामन द्वादशी आए तब वैसे तो दान एकादशी  पर प्रभु को अभ्यंग स्नान नहीं होता | परंतु एकादशी का क्षय होने वामन द्वादशी पर  अभ्यंग स्नान का क्रम \, दो राजभोग का क्रम \, शालिग्राम जी का पंचामृत क्रम आज ही के दिन किया जाता है | \nपरंतु उस अवसर मे शृंगार क्रम  दान एकादशी का होता है | और अगले दिन माने त्रयोदशी के दिन  वामन जयंती के शृंगार का क्रम निर्धारित है | \n।। वामन द्वादसी के श्रृंगार।। \nसाज : – श्रीजी में आज लाल दरियाई की बड़े लप्पा की सुनहरी ज़री की तुईलैस के हांशिया (किनारी) वाली (जन्माष्टमी वाली) पिछवाई धरायी जाती है | गादी\, तकिया एवं चरणचौकी पर सफेद बिछावट की जाती है | \nवस्त्र :-  धोती\,पटका\, कूल्हे केसरी मलमल के।पटका गाती को धरावे।ठाड़े वस्त्र स्वेत मलमल के।पिछवाई लाल सुनहरी किनारी की\,जन्माष्टमी वाली। \nआभरण:- सब नित्य के हीरा के।मध्य के श्रृंगार।कली\, कस्तूरी आदी सब माला आवे।श्रीमस्तक पे तीन चन्द्रिका को जोड़ धरावे।वेणु वेत्र हीरा के\,एक सोना को।पट उत्सव को\,गोटी सोना की ।आरसी पीले खंड की। \nअन्य सब नित्य क्रम। \nSeva kram  courtesy: Shrinathji Temple Nathdwara Management | Shrinathji Nitya darshan Facebook page |  \nवामन जयंती के पद\nराग सारंग \nबलिराजा कौ समर्पन सांचौ ॥\nबहुत कह्यौ गुरु शुक्र देवता मनदृढ आप नहिं काँचौ ॥१॥\nयज्ञ करत है जाकै कारन सो प्रभु आपुहि जाँच्यौ |\nपरमानंद प्रभु प्रसन्न भये हरि जो जनकों जानत हैं साँच्यौ ॥२॥ \nअहो बलि द्वारे ठाडे वामन ।\nचार्यो वेद पढत मुखपाठी अति सुमंद स्वर गावन ।।१।।\nबानी सुनी बलि बुझन आये अहो देव कह्यो आवन ।\nतीन पेंड वसुधा हम मागे परनकुटि एक छावन ।।२।।\nअहो अहो विप्र कहा तुम माग्यो अनेक रत्न देहु गामन ।\nपरमानंद प्रभु चरन बढायो लाग्यो पीठन पावन ।।३।।
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SUMMARY:भाद्रपद शुक्लपक्ष 11
DESCRIPTION:परिवर्तिनी एकादशी व्रतम् (दान एकादशी) \nसेवा क्रम :  \nसभी द्वार में हल्दी से डेली मंढे\,बंदरवाल बंधे।सभी समय जमना जल की झरीजी आवे।चारो समय थाली की आरती उतरे।गेंद चौगान\,दिवाला सोना के। अभ्यंग । \nसाज :– आज प्रातः श्रीजी में दानघाटी में दूध-दही बेचने जाती गोपियों के पास से दान मांगते एवं दूध-दही लूटते  श्री ठाकुरजी एवं सखा जनों के सुन्दर चित्रांकन वाली दानलीला की प्राचीन पिछवाई धरायी जाती है |\nराजभोग में पिछवाई बदल के जन्माष्टमी के दिन धराई जाने वाली लाल दरियाई की बड़े लप्पा की सुनहरी ज़री की तुईलैस के हांशिया (किनारी) वाली पिछवाई धरायी जाती है |\nगादी\, तकिया और चरणचौकी के ऊपर सफेद बिछावट की जाती है | \nवस्त्र:- छोटी काछनी\,सुथन\,पीताम्बर\,सब केसरी रूपहरी किनारी के।बड़ी काछनी लाल सुनहरी किनारी की।ठाड़े वस्त्र स्वेत जामदानी के।पिछवाई श्रृंगार में चितराम की दान के भाव की। \nआभरण:- सब उत्सव के।माणक की प्रधानता।बनमाला को श्रृंगार।कली\, कस्तूरी आदी सब माला आवे।बघनखा धरावे।मुकूट\,टोपी मानक के\,गोकुल नाथजी वाले।दान के दिन में चोटीजी नहीं आवे।मुकूट पे मुकूट पीतांबर धरावे।वेणु वेत्र माणक के\,एक हीरा को।गोटी दान की।आरसी चारझाड़ की। \nश्रृंगार के दर्शन में बड़ो कमल धरावे।राजभोग सराय के श्री बालकृष्ण लाल के दूध\,दही\,घी\,बुरा\,शहद से पंचामृत होवे।तिलक होवे\,तुलसी समर्पे। \nविशेष भोग में दही भात\,शीतल\,दुधघर को साज\,हाँड़ी\,पके गुंज्या कच्चर\,चालनी आदि अरोगे।सकड़ी में केसरी पीठ\,मीठी सेव दोहरा अरोगे\,गोपी वल्लभ में बुदी के बड़े नग\, फीका में चालनी अरोगे। \nभोग आरती के दर्शन में हीरा को वेत्र श्रीहस्त में ठाडो धरावे। \nमंगला – गोविन्द तिहारो स्वरूप निगम \n१ राजभोग – प्रगटे श्री वामन अवतार \n२ राजभोग – बली के द्वारे\, कहाँ धो री मोल \nआरती – पद्म धर्यो \nशयन – चरण कमल बंदो \nमान – आज सुहावनी रात \nपोढवे – मदन मोहन श्याम पोढे \nSeva kram  courtesy: Shrinathji Temple Nathdwara Management |  Shrinathji Nitya Darshan Facebook page  |   इन दान के 20 दिनों मे हमे हमारे सेव्य स्वरूप को दान की सामग्री नित्य धरनी चाहिए | दान की सामग्री अगर हो शके तो कुल्लड मे ही धरे | कुल्लड मे धरने से हमे भी ब्रिज का भाव होता है | प्रभु को तो आनंद मिलेगा ही | \nनोंधनीय बात यह है की एक बार जो कुल्लड मे सामग्री धरे फिर वह पात्र प्रसादी हो जाता है | उसको खासा करके भी नहीं धर शकते | नया कुल्लड ही सामग्री धरने मे ले | 20 दिनों के 20 कुल्लड की ही आवश्यकता है |  दान के पद हमारे पध्य साहित्य सेक्शन मे मिल जाएंगे  | https://vrajdwar.org/hi/adhyayan/padhya-sahitya/
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SUMMARY:भाद्रपद शुक्लपक्ष 8
DESCRIPTION:राधाष्टमी  \nविशेष :- भोग आरती में ढाढ़ी\,ढाढन नाचे। \nसभी द्वार में हल्दी से डेली मंढे\,बंदरवाल बंधे।सभी समय जमना जल की झरीजी आवे।चारो समय थाली की आरती उतरे।गेंद चौगान\,दिवला सोना के।अभ्यंग ।चौखटा हीरा को जड़ाऊ ।तकिया साज सब जड़ाऊ। \nवस्त्र:- चागदार बाग\,चोली\,पटका किनारी के फूल वालो\, कूल्हे सब केसरी जामदानी के।सुथन लाल रेशमी सुनहरी छापा की।ठाड़े वस्त्र मेघ स्याम दरियाई के।पिछवाई लाल दरियाई के \,बड़े लप्पा की\,जन्माष्टमी वाली। \nआभरण:- सब उत्सव के।दो जोड़ी को श्रृंगार हीरा\, माणक को।चोटीजी हीरा की।श्रीमस्तक पे पाँच चन्द्रिका को जोड़ धरावे।वेणु वेत्र तीनो हीरा के।मोती को कमल आवे।पट गोटी जड़ाऊ।आरसी जड़ाऊ व राजभोग में सोना के डाँड़ी की। \nगोपी वल्लभ के भोग सराय के\,स्वामिनीजी के श्रृंगार होवे।माला को जोड़ नयो धरावे।श्रीजी के उबटना से कमल पत्र मढ़े\,गुलाल अबीर चन्दन\,चोवा से सूक्ष्म खेल होवे। फिर जड़ाऊ आरसी दिखा के तिलक\,आरती होवे। शंख\, झालर\, घंटानाद के द्वारा स्वामिनीजी के आगमन का स्वागत किया जाता हैं | \nविशेष भोग में बूंदी\,सकरपारा\,पंजीरी के नग\, श्रीखंड बड़ी\,खीर\,दूध घर को साज\,कच्चर\,चालनी\,शीतल\,आदी अरोगे।गोपी वल्लभ में मनोहर के नग\, फीका में चालनी अरोगे।सकड़ी में केसरी पेठा\,मीठी सेव\,पाँच भात \,सुरन को कच्चर आदी अरोगे। \nशयन समय डोल-तिबारी में ध्रुव-बारी के पास में प्रिया-प्रीतम के भाव से बिछायत होती है | कांच का बंगला धरा जाता है |  एवं विविध सज्जा की जाती है | जो कि अनोसर में भी रहती है | और अगले दिन शंखनाद पश्चात हटा ली जाती है | \nमंगला – बधाई है बरसाने आज  \nराजभोग आय (भीतर तिलक) -रावल राधा प्रकट भई  \nआरती – श्री व्रखभान राय ज़ू के आँगन  \nशयन – भादो की उजियारी \nSeva kram  courtesy: Shrinathji Temple Nathdwara Management |    Badhai – Palna k Pad kirtan
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DESCRIPTION:ऋषि पंचमी\, द्वितीय स्वरूपोत्सव।
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DESCRIPTION:गणेश चतुर्थी ।
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SUMMARY:भाद्रपद शुक्लपक्ष 1
DESCRIPTION:राधाष्टमी की बधाई बैठे |
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SUMMARY:श्रावण कृष्णपक्ष 30
DESCRIPTION:कुशग्रहणी अमावस
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SUMMARY:श्रावण कृष्णपक्ष 11
DESCRIPTION:अजा एकादशी व्रतम्।
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SUMMARY:श्रावण कृष्णपक्ष 10
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SUMMARY:श्रावण कृष्णपक्ष 9
DESCRIPTION:नंद महोत्सव | महा महोत्सव | \nकल रात्री को संध्या आरती पश्चात प्रभु शयन भोग आरोग कर जागरण मे बिराजे | 11:45  बजे तक जागरण के दर्शन होते है | फिर नाथद्वारा मे भीतर मे प्रभु का जन्म होता है | नाथद्वारा मे जन्म के दर्शन नहीं होते है | \nकुछ स्थानों मे प्रणालिका अनुसार जन्म के दर्शन होते है | संखनाद\, जालर\, घंटा की ध्वनि मे प्रभु का जन्म होता है | नाथद्वारा मे श्रीजी के सन्मुख बिराजित श्री बालकृष्णजी के पंचामृत स्नान होते है | तद पश्चात प्रभु को महाभोग धरे जाते है | \nफिर आज के दिन \nवस्त्र\,आभरण\,चौखटा\,पिछवाई\,सब साज\,वेणु वेत्र आदी सब कल के ही रहे।आरसी चार झाड़ की। \nप्रातः 5 :30 महाभोग सराय के।झरीजी\,माला बदले\,चोक माड़ के ठाकुरजी श्री नवनीत प्रियाजी कूं सोना के पलना में पधारे।आरती होवे\,तिलकायत यशोदाजी\,नंदबाबा\,कु पधरावे\,छट्टी की पूजा होवे फिर ग्वाल गोपी को पधरावे।फिर मनिकोठा\,डोल तिबारी\,रतन चोक में नन्द उत्सव होवे।दूध दही को छिड़काव होवे।बिड़ी अरोगे।आरती न्योछावर\,राई लोन होवे।नन्द राय जी बैठक में पधारे। \nभोग में केसरी पेठा\,मीठी सेव\,पाँच भात आदी सामग्री अरोगे। \nमणिकोठा – ऐ री ऐ आज नन्दराय\, सब ग्वाल नाचे\, महा मंगल महराने\, उच्छव हो बड़ कीजे  \nडोल तिबारी – आपून मंगल\, मंगल गाओ माई\, जायो हो सुत\, चिरजियो हो लाल \nरतन चौक – नन्द के दधि\, मेरे गोपाल\, आज कुलाहल\, ग्वाल देत है हेरी\, गोकुल में बाजत \nनन्दमहोत्सव पीछे – नैन भर देखो\, आज नन्दजू के द्वारे\, पालना के ८ पद \nनंदोत्सव के दर्शन 11 बजे के आसपास होते है | फिर श्री नवनीत प्रियाजी अपने घर पधराके मंगल भोग आरोगाया जाता है | 12:15 बजे मंगला के दर्शन होते है | मंगला और शृंगार के दर्शन साथ मे होते है | टेरा लेकर मालाजी धराई जाती है | फिर राजभोग के दर्शन 2:15 बजे खुलते है | बाकी का क्रम नित्य अनुसार होता है | \nSeva kram  courtesy: Shrinathji Temple Nathdwara Management | Shrinathji Nitya Darshan Facebook page     Badhai – Palna k Pad kirtan
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SUMMARY:श्रावण कृष्णपक्ष 8
DESCRIPTION:जन्माष्टमी व्रतम् | \nआज प्रभु को पंचामृत स्नान होता है | साज सजावट सभी नई होती है | आज भारी से अतिभारी शृंगार क्रम होता है | आज मद्य  रात्री मे प्रभु का जन्मोत्सव मनाया जाता है | आज मंदिरों मे संध्या आरती दर्शन पश्चात जागरण के दर्शन होते है | जो मध्य रात्री तक होते है | हवेली मंदिरो मे अपनी प्रणालिका अनुसार जागरण के दर्शन होते है | फिर संखनाद के साथ प्रभु जन्म उत्सव मनाया जाता है | तब बालकृष्णजी स्वरूप को पंचामृत स्नान कराया जाता है | समग्र रात्री उत्सव भोग धराकर प्रातः नंद महोत्सव मनाया जाता है | \nवैष्णवों के घर मे सेवा मे प्रभु को रात्री तक जगाने का क्रम नहीं है | प्रभु को  पोढ़ाने का क्रम होता है |  हवेली – वैष्णव घरों की सेवा प्रणालिका भिन्न होती है | \nश्रीनाथजी में जन्माष्टमी निमित सभी साजा नयी आती हैं. जैसे शैयाजी की गादी\, चादर\, श्रीजी सेवा में धराए जाने वाले लकड़ी के खिलौना\, लकड़ी के पट्टे (जिन पर भोग आवे) इत्यादि | सभी द्वार में हल्दी से दोहरा डेली मंढे\,बंदरवाल बंधे।सभी समय जमना जल की झरीजी । \nचारो समय थाली की आरती।गेंद चौगान\,दिवाला सोना के।मंगला आरती पीछे श्रीजी को धोती उपरना धरावे व तिलक अक्षत होके\, दूध\,दही\,घी\,बुरा\,शहद से पंचामृत होवे।मंगला के दर्शन पीछे फुलेल\,आंवला\,चन्दन\,उबटना से प्रभु के दोहरा अभ्यंग होवे।चौखटा प्राचीन जड़ाऊ ।तकिया जड़ाऊ। \nवस्त्र:- चागदार बाग\,चोली\,पटका\, कूल्हे सब केसरी जामदानी के।सुथन रेशमी सुनहरी छापा की।ठाड़े वस्त्र मेघ स्याम दरियाई के।पिछवाई लाल दरियाई के \,बड़े लप्पा की। \nआभरण:- सब उत्सव के।तीन जोड़ी को श्रृंगार।\,हीरा\, पन्ना\,माणक व मोती के हार\, माला आदी धरावे।कस्तूरी\,कली आदी सब माला आवे।दो हालरा\,बघनखा आदी धरावे।चोटीजी माणक की।श्रीमस्तक पे पाँच चन्द्रिका को जोड़ धरावे।वेणु वेत्र तीनो हीरा के।पट गोटी जड़ाऊ।आरसी जड़ाऊ व राजभोग में उस्ताजी की बड़ी दिखावे। \nश्रृंगार में तिलक होवे।पण्ड्याजी वर्ष बाचे।आरती। \nआज से राजभोग के अनोसर भीतर होवे।नित्य क्रम से शयन तक की सेवा होवे।फिर जागरण के दर्शन खुले।जन्म के समय 21 तोप की सलामी देवे।फिर पंचामृत होवे। \nफिर महाभोग धरावे।महाभोग मे राजभोग वत सब सकड़ी\,पाँच भात\,केसरी पेठा\,मीठी सेव आदी अरोगे।अन सकड़ी में छुट्ठी बूंदी\,दूध घर कोसाज\,घेवर\,बाबर\,सेव\,मठड़ी\,गुंज्जा\,आदि सभी सामग्री आवे। \nमंगला – नैन भर देखो नन्दकुमार (समाज के साथ)  \nतिलक – आज बधाई को दिन नीको  \nराजभोग- ऐ रीऐ आज नन्दराय के आनंद \nआरती –  यह धन धर्म ही ते पायो \nशयन – चलो मेरे लाडिले हो \nजागरण – पद्म धर्यो\, मोहन नन्द्रराय\, वन्दे धरन\, भादो की रात\, महानिस भादो\, जन्म लियो शुभ \nSeva kram  courtesy: Shrinathji Temple Nathdwara Management |\nBadhai – Palna k Pad kirtan
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SUMMARY:श्रावण कृष्णपक्ष 7
DESCRIPTION:शयन में षष्ठी  को उत्सव | विष्णुस्वामि प्राकट्योत्सव |  तीन समय थाली की आरती उतरे | गेंद चौगान\, दिवाला सोने के | सभी समय जमना जल की झारीजी आवे | तकिया जड़ाऊ |\nवस्त्र : पिछोड़ा लाल डोरिया को\, रूपहरी किनारी को | श्री मस्तक पे छज्जेदार पाग | ठाड़े वस्त्र पीले | पिछवाई पिली मलमल कि |\nआभरण : सब हीरा के | छेडान को शृंगार | त्रवल नहीं आवे\, हीरा कि बद्धि धरावे | श्री मस्तक पे सादा मोर चंद्रिका | पट उत्सव को\, गोटी जड़ाऊ | आरसी लाल मखमल की |\nविशेष मे आज शयन भोग के संग षष्टि उत्सव को भोग आवे | भोग मे फेनी को थाल\, बासोंदि\, फीके खाजा\, पतली पूड़ी\, केरी को मुरब्बा\, सोंठ आदि सामग्री आरोगे | गोपीवल्लभ मे घेवर\, फीका मे चालनी अरोगे |
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SUMMARY:श्रावण कृष्णपक्ष 3
DESCRIPTION:कज्जली तीज
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DESCRIPTION:हिंदोला विजय सायं संध्या मे
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SUMMARY:श्रावण कृष्णपक्ष 1
DESCRIPTION:हेम – हिन्दोला
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